सोमनाथ मन्दिर, गुजरात | Somnath Temple- Gujrat
सोमनाथ भारत के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग में से एक है तथा 12 ज्योतिर्लिंग में से पहला भी है। यह गुजरात के प्रभास पाटन, वेरावल में अरब सागर के तट पे है।
मंदिर का निर्माण
सोमनाथ मंदिर पर अतीत में कई आक्रमणकारियों ने द्वारा बार-बार आक्रमण करके इसको ध्वस्त किआ और लूट पात की और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण हिंदू मंदिर वास्तुकला की चालुक्य शैली में किया गया। वर्तमान मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य 1951 में पूर्ण हुआ। भारत के आज़ादी के बाद लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल स्वयं यहां का दौरा किया था और इसके पुनर निर्माण और बिस्तार का कार्य आरम्भ करवाया था। पहले जिस जगह पे मंदिर था उसी जगह पर दूसरी बार मंदिर का पुनर्निर्माण सातवीं सदी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने किया। उसके बाद इसको अरब के आक्रमण को झेलना पड़ा। तीसरी बार इसका पुनर्निर्माण गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में करवाया। इस मंदिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली थी। एक फ़ारसी विद्वान लेखक अल-बिरुनी ने अपने एक किताब में इस मंदिर की कीर्ति और भब्यता का जिक्र किया था , उसी से प्रभावित होकर 1025 ईस्वी में अफगान शासक महमूद गजनी के सोमनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया गया और सारा धन लूट लिया। अल-बिरुनी के किताब में इसका भी जिक्र की महमूद गजनी ने मंदिर में पूजा कर रहे 50000 लोगों का क़त्ल करवा दिया था। बाद में गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया। आक्रमण और पुनर निर्माण का सिलसिला जारी रहा। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया। आज़ादी के बाद लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल स्वयं यहां का दौरा किया था और इसके पुनर निर्माण कार्य आरम्भ करवाया था। सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने 9 May 1950 को मंदिर की आधारशिला रखी तथा 11 May 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में ज्योतिर्लिग स्थापित किया।नवीन सोमनाथ मंदिर 1962 में पूर्ण निर्मित हो गया।
पौराणिक कथाएं
ऐसा कहा जाता है की भगवन श्री कृष्णा ने चन्दन के लकड़ियों से द्वापर युग में इस मंदिर का निर्माण किया था, लेकिन इसका इतिहास इससे भी पहले का है। ग्रंथों के अनुसार इस मंदिर को सत्य युग में भैरवेश्वर, त्रेता युग में श्रवणिकेश्वर और द्वापर युग में श्रीगलेश्वर के नाम से जाना जाता है। प्राचीन हिन्दू ग्रंथों के अनुसार चन्द्र देव (Moon God) ने, राजा दक्ष (भगवन ब्रह्मा के पुत्र) की 27 पुत्रियों से विवाह किया था। राजा दक्ष की 27 पुत्रियों में से रोहिणी से उनका ज्यादा ही लगाव था, वो रोहिणी को ज्यादा प्यार व सम्मान दिया करते थे। इस बात से दुखी होकर उनकी 26 पुत्रियों ने पिता से इसकी शिकायत की। अपने 26 पुत्रियों पे होते हुए अन्याय को देखकर क्रोध में आकर राजा दक्ष ने चंद्रदेव को शाप दे दिया कि अब से हर दिन तुम्हारा तेज क्षीण होता रहेगा। इसके फलस्वरूप हर दिन चंद्र देव का तेज कम होने लगा। शाप से दु:खी चंद्र देव ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। उन्होंने करोडो बार महा मृत्युंजय का जाप किया। अंततः शिव प्रसन्न हुए और चंद्र देव को श्राप से मुक्त किया। इसके बाद चंद्र देव ने इस मंदिर का निर्माण करवाया और प्रभु शिव का स्थापन करवाया।
श्री कृष्णा का वैकुंठ गमन
ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे। तब एक भील शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पद्मचिह्न को हिरण की आँख जानकर अनजाने में तीर मारा था। तब ही कृष्ण ने देह त्यागकर यहीं से वैकुंठ गमन किया। इस स्थान पर बड़ा ही सुन्दर कृष्ण मंदिर बना हुआ है।
पूजा का समय
मंदिर सुबह 6:00 से लेकर रत के 9:30 तक खुला रहता है। यहां दिन में 3 बार आरती होती है- सुबह 7 बजे , दोपहर 12 बजे और रात 7 बजे। अगर आपको आरती में भाग लेना है तो थोड़ा पहले जाइये। सोमनाथ मदिर का आरती को वहां स्वयं देखना बहुत ही गजब का अनुभव हैं, इसलिए आप कोशिश करें कि आप इसे जरूर देखें। आप आरती का लाइव स्ट्रीमिंग ऑनलाइन घर से भी देख सकते हैं। आप आरती का लाइव स्ट्रीमिंग YouTube या फिर सोमनाथ मंदिर के आधिकारिक वेबसाइट पे देखा सकते हैं। यह तीर्थ पितृगणों के श्राद्ध के लिए भी प्रसिद्ध है। चैत्र, भाद्रपद, कार्तिक माह में यहां श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है।
इस मंदिर में कैमरा, पर्स, मोबाइल ले जाने कीअनुमति नहीं है। इसलिए आप इसे अपने होटल में छोड़कर आएं। या फिर आप इसे मंदिर के गेट के पास बने लॉकर रूम में रख सकते है। धयान रहे, किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक चीज़ अंदर ले जाने की अनुमति नहीं हैं, इसलिए अगर आपके पास अपने कार का भी रिमोट चाभी हैं तो इसको लॉकर में रख दें, वरना सिक्योरिटी वाले आपको वापस भेज देंगे। यहां एक डिजिटल लॉकर भी है।
सोमनाथ मन्दिर के पास रहने का स्थान
मन्दिर के पास बहुत से होटल्स , गेस्ट हाउस और धर्मशालायें है। आप इनको ऑनलाइन आरक्षित (बुक) कर सकते है। त्यहारों से समय तो यहां बहुत भीड़ होती है इसलिए अगर आपका त्योहारों में आने का प्लान है तो बेहतर होगा की पहले ही बुकिंग कर लें।
सोमनाथ मंदिर के आस पास घूमने और देखने की जगह
त्रिवेणी संगम- यह महासंगम सोमनाथ मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर दूर हैं। यह संगम हिरण्य नदी, सरस्वती नदी और कपिला नदी के मिलने से बना है। ये तीनो नदिया संगम बनाने के बाद अरब सागर में मिल जाती हैं। यह घाट बहुत ही सुन्दर है। सर्दियों के मौसम में यहां बहुत से प्रवाशी पक्षी भी आते हैं।
सूर्य मंदिर - ये त्रवेणी संगम के पास में ही है। यह सूर्य मन्दिरर है और इसके पास कुछ गुफा है आप जिसे देख सकते हैं।
भालका तीर्थ - ऐसा कहा जाता है की श्री कृष्णा को यहां मुक्ति मिली थी। इसी जगह पे श्री कृष्णा के पैर को हिरण की आँख जानकर अनजाने में एक भील ने गलती से तीर मारा था। इसके बाद कृष्ण ने देह त्यागकर यहीं से वैकुंठ गमन किया था। यहां पे एक पुराना मंदिर था किसका अभी हाल में ही जीर्णोद्धार हुआ है।
बाण गंगा - यहां समुन्द्र के अंदर शिवलिंग है जो पन्नी के अंदर रहता है। औ समुद्र के पानी से शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं।
पांडव गुफा- सोमनाथ मंदिर से 1.5 किमी की दूरी पर और सोमनाथ रेलवे स्टेशन से 2 किमी की दूरी पर है पंच पांडव गुफ़ा। इस गुफा की खोज स्वर्गीय बाबा नारायणदास ने वर्ष 1949 में की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान यहां माता हिंगलाज की पूजा की थी। गुफा में एक मंदिर है जो पांडव भाइयों को समर्पित है। यहां शिव, सीता मां, राम-लक्ष्मण, भगवान हनुमान और देवी दुर्गा के सम्मान में मंदिर भी हैं।
लाइट एंड साउंड लेज़र शो - 3D लाइट एंड साउंड लेज़र शो के जरिये मन्दिर का इतिहास दिखाया जाता हैं। यह प्रकाश और ध्वनि का प्रदर्शन बहुत ही गजब का हैं, जो आपको रोमांचित कर देगा। यह रोज़ रात को 8 से 9 बजे के बीच होता हैं, आप इसे देख सकते हैं।
गिर नेशनल पार्क- सोमनाथ मंन्दिर से लगभग 50 किलोमीटर दूर हैं गिर नेशनल पार्क। गिर नेशनल पार्क एशियाटिक लायंस (शेर) के लिए फेमस हैं। इसे देखने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं। आप यहाँ पे जंगल सफारी का आनंद ले सकते हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार यहाँ शेरो की संख्या में बृद्धि हुई हैं, जिसको PM नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करके शेयर किया था।
द्वारकाधीश मन्दिर - द्वारकाधीश का मन्दिर सोमनाथ से लगभग 240 KM दूर है। आप इसको भी अपने यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
मंदिर तक कैसे पहुंचे
सोमनाथ में कोई हवाई अड्डा नहीं है। सोमनाथ से सबसे नज़दीक दिउ का हवाई अड्डा हैं जो लगभग 90 किलोमीटर दूर हैं। इसके अलावा राजकोट (200 KM ), अहमदाबाद (400 KM) और बड़ोदरा (420 KM) का हवाई अड्डा भी हैं, लेकिन ये थोड़े दूर हैं।अगर आप हवाई यात्रा करके आते हैं तो, एयरपोर्ट से निकलने के बाद वहां से आप ट्रैन या बस से आ सकते हैं। वैसे तो सोमनाथ में भी रेलवे स्टेशन है लेकिन अधिकतर ट्रैन वेरावल तक ही आती हैं। वेरावल का रेलवे स्टेशन सोमनाथ मंदिर से 7, 8 किलोमीटर दूर है। इसलिए आप अगर ट्रैन से आना चाहते हैं तो वेरावल के लिए ट्रैन सर्च करें। वेरावल से सोमनाथ आने के लिए ऑटो और टैक्सी की कमी नहीं हैं।
मंदिर जाने का सही समय
सोमनाथ की यात्रा का सबसे अच्छा मौसम सर्दियों का मौसम है। सर्दियां नवंबर में सोमनाथ पहुंचती हैं और फरवरी तक चलती हैं। इस समय तापमान सहज रहता है और दर्शनीय स्थलों के लिए उपयुक्त है। अगर आपको त्यौहार में जाना है तो इस प्राचीन मंदिर में जाने का सबसे पसंदीदा समय फरवरी या मार्च (हिंदू कैलेंडर के आधार पर) का महीना है, जब महा शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। गर्मी के मौसम में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है जो को बहुत असहज हो जाता है।
मंदिर के यात्रा का कार्यक्रम- itinerary
अगर आप दूर से दर्शन करने आ रहे हैं तो आप वहां पहुंचकर आराम करें या लोकल जगह घूम ले कुछ खरीदना हो तो ख़रीददारी कर ले। अगर आप सुबह या दोपहर से पहले पहुंच गए हैं तो उसी दिन भी दर्शन कर सकते है। वैसे तो मंदिर में दर्शन रात तक संभव है लेकिन सुबह दर्शन करने का अनुभूति अलग है। अगली सुबह सोमनाथ मंदिर में दर्शन कर ले । मंदिर के आप पास की जगह आप उसी दिन आराम से घूम सकते हैं। अगर आपके यात्रा में गिर नेशनल पार्क है तो आप उसी दिन या अगले दिन वहां जा सकते हैं। ये सब करने के बाद अगर आपके यात्रा में द्वारका भी शामिल है तो द्वारका के लिए प्रस्थान करें।
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